Rajesh Khadia-Contribution to Kharia Language
राजेश खड़िया: खड़िया भाषा के संरक्षक और शिक्षक
राजेश खड़िया झारखंड के गुमला जिले से जुड़े एक प्रमुख खड़िया समाज के कार्यकर्ता, भाषा शिक्षक और सांस्कृतिक संरक्षक हैं। वे खड़िया भाषा (जिसे खड़िया या खड़िया भी लिखा जाता है) को बचाने, बढ़ावा देने और सिखाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उनकी YouTube चैनल TUBE 100 (@TUBE-zw9je) खड़िया भाषा सीखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जहां उन्होंने भाषा के विभिन्न पहलुओं पर सीरीज बनाई हैं।
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
राजेश खड़िया, खड़िया आदिवासी समुदाय से belong करते हैं, जो मुख्य रूप से झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बसा है। खड़िया भाषा ऑस्ट्रो-एशियाटिक (मुंडा) परिवार की है और लगभग 3 लाख लोगों द्वारा बोली जाती है। वे गुमला क्षेत्र में सक्रिय हैं, जहां खड़िया समुदाय की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को मजबूत करने के प्रयास चल रहे हैं। उनके बारे में विस्तृत व्यक्तिगत विवरण (जैसे जन्म तिथि या शिक्षा) सार्वजनिक रूप से सीमित उपलब्ध हैं, लेकिन वे स्थानीय स्तर पर एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं।
खड़िया भाषा और संस्कृति के संरक्षण में योगदान
राजेश खड़िया खड़िया भाषा को झारखंड की दूसरी राज्य भाषा के रूप में शामिल करने और स्कूल/कॉलेज स्तर पर इसके शिक्षण के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने प्लस-टू स्तर पर खड़िया विषय के पदों को शून्य करने का विरोध किया है और इसे “धोखा” बताया है। वे अखिल भारतीय खड़िया महासभा और खड़िया विकास समिति गुमला से जुड़े रहे हैं, जहां वे पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
वे विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हैं:
- खड़िया संस्कृति, भाषा और पहचान की रक्षा के लिए जागरूकता कार्यक्रम।
- स्वतंत्रता सेनानी तेलंगा खड़िया की जयंती समारोह।
- बंदोई पर्व (खड़िया समुदाय का महत्वपूर्ण त्योहार) और सरहुल जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका।
उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर खड़िया भाषा को आधिकारिक मान्यता, सामुदायिक भवन और शिक्षा में शामिल करने की मांग की है। वे खड़ियापाड़ा जैसे क्षेत्रों में बाहरी प्रभावों से समुदाय की रक्षा और एकजुटता पर जोर देते हैं।
YouTube चैनल TUBE 100 और भाषा शिक्षण
राजेश खड़िया का YouTube चैनल TUBE 100 खड़िया भाषा के ऑनलाइन शिक्षण का प्रमुख माध्यम है। चैनल पर “खड़िया भाषा” सीरीज उपलब्ध है, जिसमें:
- बुनियादी शब्दावली, वाक्यांश और व्याकरण।
- संख्या, दिन, वाक्य आदि पर वीडियो।
- शुरुआती स्तर से लेकर आगे के पाठ शामिल हैं।
वीडियो सरल और व्यावहारिक हैं, जो खड़िया समुदाय के युवाओं और भाषा प्रेमियों को अपनी मातृभाषा सीखने में मदद करते हैं। चैनल पर वीडियो वर्षों से अपलोड हो रहे हैं और टिप्पणियों में लोग धन्यवाद देते हुए और अधिक पाठों की मांग करते दिखते हैं। यह उनके भाषा संरक्षण के प्रयासों का डिजिटल विस्तार है।
अन्य गतिविधियां
- खड़िया विकास समिति: पूर्व अध्यक्ष के रूप में समाज की एकजुटता, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण पर काम।
- आंदोलन और जागरूकता: भाषा के पद शून्य करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम की चेतावनी।
- स्थानीय कार्यक्रमों में मुख्य भूमिका, जैसे सांस्कृतिक समारोहों में भाषण और नेतृत्व।
विरासत और प्रभाव
राजेश खड़िया की मेहनत खड़िया भाषा को विलुप्त होने से बचाने और नई पीढ़ी को जोड़ने में महत्वपूर्ण है। खड़िया भाषा में साहित्य, गीत और लोककथाएं समृद्ध हैं, लेकिन आधुनिक समय में इसका उपयोग घट रहा है। उनके जैसे कार्यकर्ता भाषा को जीवित रखने में मदद कर रहे हैं। YouTube चैनल के माध्यम से वे भौगोलिक सीमाओं से परे पहुंच रहे हैं।
राजेश खड़िया का जीवन समर्पण का उदाहरण है — आदिवासी पहचान, भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष। उनकी कहानी झारखंड के आदिवासी आंदोलनों का हिस्सा है, जहां भाषा सिर्फ संचार का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान का प्रतीक है।
नोट: यह जीवनी उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों (समाचार, YouTube और सामाजिक गतिविधियों) पर आधारित है। अधिक व्यक्तिगत विवरण के लिए उनसे सीधे संपर्क या स्थानीय स्रोतों का सहारा लिया जा सकता है। उनके चैनल को सब्सक्राइब करके भाषा सीखने का समर्थन करें।
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